प्री-प्राइमरी संविदा शिक्षक भर्ती 2025: 313 स्कूलों में होगी नियुक्ति, जानें आवेदन प्रक्रिया और ECCE प्रशिक्षण की पूरी जानकारी

प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिलेगा नया आधार 313 स्कूलों में संविदा शिक्षकों की होगी नियुक्ति शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ,

3 से 6 साल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा देने की तैयारी भारत में प्रारंभिक शिक्षा की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है ।
बाल विकास और शिक्षा विभाग ने प्री-प्राइमरी शिक्षा Pre-Primary Education को मजबूती देने के लिए 313 स्कूलों में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति की घोषणा की है ।
यह पहल 3 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को बेहतर शैक्षिक अनुभव देने और उन्हें स्कूल के माहौल से जोड़ने के लिए की जा रही है ।

👉 क्या है यह योजना ?

इस योजना के तहत 2803 विद्यालयों को प्री-प्राइमरी शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है , जिसमें से फिलहाल 313 स्कूलों में संविदा शिक्षक तैनात किए जाएंगे । इस प्रक्रिया के तहत बच्चों को खेलने के माध्यम से शिक्षा देने की विशेष व्यवस्था की जाएगी ताकि वे शुरुआती उम्र से ही सीखने की आदत डाल सकें ।

👉 आवेदन प्रक्रिया

जो अभ्यर्थी इस संविदा शिक्षक पद के लिए आवेदन करना चाहते हैं

उन्हें 30 सितंबर 2025 तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा । इसके लिए एक सेवा योजना पोर्टल तैयार किया गया है । पूरी चयन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे ।
शिक्षक चयन में होगा दक्षता का मूल्यांकन संविदा शिक्षकों के चयन में एक खास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा । चयनित अभ्यर्थियों को टीचर ट्रेनिंग माड्यूल से प्रशिक्षित किया जाएगा ।

यह प्रशिक्षण बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है । इसके अतिरिक्त , शिक्षकों को ECCE – Early Childhood Care and Education आधारित मॉड्यूल के तहत भी प्रशिक्षित किया जाएगा ।

👉 किसे मिलेगा नियुक्ति का अवसर ?

सभी इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा और इसके बाद योग्यता के आधार पर चयन किया जाएगा । आवेदन करते समय शैक्षिक योग्यता , अनुभव और प्रशिक्षण आदि को ध्यान में रखा जाएगा ।
जिन जिलों में ये संविदा शिक्षक नियुक्त होंगे , उनमें से 173 विद्यालय शहरी क्षेत्रों में और 140 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं । इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के बच्चों को समान शिक्षा अवसर मिलें ।

👉प्री -प्राथमिक शिक्षा क्यों आवश्यक है?

वैज्ञानिकों ने शोध के माध्यम से सिद्ध किया है कि मानसिक और बौद्धिक विकास की नींव 3 से 6 वर्ष की आयु के बीच रखी जाती है। यदि इस आयु में सही मार्गदर्शन और अनुकूल शैक्षिक वातावरण मिले, तो आगे की यात्रा और भी मज़बूत और सफल होगी।
इसीलिए केंद्र और राज्य सरकारें अब प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुँचाने के लिए संगठन और एक प्रभावी तरीके की तैयारी कर रही हैं।

👉ECCE मॉडल का कार्यान्वयन यह योजना ECCE प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा मॉडल को लागू करेगी। यह मॉडल बच्चों को खेल, गीतों, कहानियों और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने पर आधारित है। परिणामस्वरूप, वे न केवल चीजों को तेज़ी से समझते हैं, बल्कि अध्ययन के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ती है।

👉 जिला शिक्षा अधिकारियों की भूमिका: प्रत्येक जिले में एक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी होता है, जो पूरी प्रक्रिया की देखरेख करेगा। चयन से लेकर प्रशिक्षण, नियुक्ति और मूल्यांकन तक की पूरी प्रक्रिया जिला स्तर पर होगी, लेकिन अधिकार राज्य शिक्षा विभाग के पास ही रहेगा।

👉भविष्य की तैयारी:-

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में ईसीसीई प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध हो। इससे बच्चों को पहली कक्षा से ही बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा। 11वीं पंचवर्षीय योजना में अब तक इसके लिए काफी प्रयास किए जा चुके हैं।

निष्कर्ष:-

यह योजना भारत में प्रारंभिक शिक्षा को एक नई दिशा देने वाली है। संविदा शिक्षकों की भर्ती से न केवल बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का काम कर सकता है। अगर आप शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की सोच रहे हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। आवेदन 30 सितंबर, 2025 तक किए जा सकते हैं। शिक्षा के इस नवाचार का हिस्सा बनें ।

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